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Kiya Tum Thak Gye – कुरआन की रवायत

  • Kiya Tum Thak Gye

Kiya Tum Thak Gye

मैं थक गया हूं,
मैं जिंदगी के सफ़र से थक गया हूं,
क्या तुम इतने थक गए हो.? कि अपने सहारे बैठ कर कूरान भी नहीं पढ़ सकते.?
क्या तुम इतने थक गए हो.?—– कि अपने पैरों पर खड़े होकर अल्लाह पाक के हुजूर सजदा भी नहीं कर सकते.?

अगर तुम अपने सहारे बैठ कर कूरान पढ़ सकते हो, अपने पैरों पर खड़े होकर अल्लाह पाक के सामने सजदा रेज़ हो सकते हो। —- तो यकीन जानो तुम अभी थके नहीं हो, जिंदगी के सफ़र से तुम अभी थके नहीं हो और ना थक सकते हो।

थकने का ख्याल शैतान का हो सकता है, अल्लाह के बन्दों का नही!
कूरान पढ़ते जाओ,
अल्लाह पाक के हजूर सजदा करते जाओ, जिंदगी के सफ़र में चलते जाओ, इंशा अल्लाह कभी नहीं थकोगे।
क्योंकि

कूरान कहता है :

  • فَاذْكُرُوْنِیْۤ اَذْكُرْكُمْ وَ اشْكُرُوْا لِیْ وَ لَا تَكْفُرُوْنِ۠

So remember Me; I will remember you. And be grateful to Me and do not deny Me.

सो तुम मुझे याद करो, मै तुम्हे याद करूंगा और मेरा शुक्र करो नाशुक्री ना करो। ( Surah Baqrah: Ayat 152)

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Md wasim Ansari

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