Mirza Ghalib Shayari

Top 101 Mirza Ghalib Shayari In Hindi – [2020] मिर्ज़ा ग़ालिब आशिकी शायरी

Mirza Ghalib Shayari in Hindi

Mirza Ghalib Shayari In Hind

कोई दिन गर ज़िंदगानी और है,
अपने जी में हमने ठानी और है!
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आशिक़ी सब्र-तलब और तमन्ना बेताब
दिल का क्या रंग करूँ ख़ून-ए-जिगर होते तक!
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आये घर में हमारे , खुदा की कुदरत है,
कभी हम उन्हें कभी अपने घर को देखते है!
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एक एक क़तरे का मुझे देना पड़ा हिसाब
ख़ून-ए-जिगर वदीअत-ए-मिज़्गान-ए-यार था!
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दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है!
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Top Sher Of Mirza Ghalib Shayari in Hindi

Mirza Ghalib Shayari In Hind

हम हैं मुश्ताक़ और वो बे-ज़ार
या इलाही ये माजरा क्या है!
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इश्क़ पर जोर नहीं , यह तो वो आतिश है, ग़ालिब,
जो लगाये न लगे और बुझाए न बुझे!
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हजारों ख्वाहिशें ऐसी की हर ख्वाहिश पे दम निकले,
बहुत निकले मेरे अरमान , लेकिन फिर भी कम निकले!
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कहते हैं जीते हैं उम्मीद पे लोग
हम को जीने की भी उम्मीद नहीं!
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काबा किस मुँह से जाओगे ‘ग़ालिब’
शर्म तुम को मगर नहीं आती!
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Best Mirza Ghalib Status In Hindi

Mirza Ghalib Shayari In Hind

इक शौक़ बड़ाई का अगर हद से गुज़र जाए
फिर ‘मैं’ के सिवा कुछ भी दिखाई नहीं देता!
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तोड़ा कुछ इस अदा से तालुक़ उस ने ग़ालिब,
के सारी उम्र अपना क़सूर ढूँढ़ते रहे!
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मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का,
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले!
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आशिक़ हूँ प माशूक़-फ़रेबी है मिरा काम,
मजनूँ को बुरा कहती है लैला मिरे आगे!
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चंद तस्वीर-ऐ-बुताँ , चंद हसीनों के खतूत .
बाद मरने के मेरे घर से यह सामान निकला!
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Mirza  Ghalib Shayari In Hindi and Urdu

Mirza Ghalib Shayari In Hind

आए है बेकसी-ए-इश्क़ पे रोना ‘ग़ालिब’
किस के घर जाएगा सैलाब-ए-बला मेरे बअ’द!
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कहूँ किस से मैं कि क्या है शब-ए-ग़म बुरी बला है,
मुझे क्या बुरा था मरना अगर एक बार होता!
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हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले,
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले!
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क़ैद-ए-हयात ओ बंद-ए-ग़म अस्ल में दोनों एक हैं
मौत से पहले आदमी ग़म से नजात पाए क्यूँ!
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Two Line Mirza Ghalib Shayari In Hindi

Mirza Ghalib Shayari In Hind

यही है आज़माना तो सताना किसको कहते हैं,
अदू के हो लिए जब तुम तो मेरा इम्तहां क्यों हो!
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उम्र भर हम भी गलती करते रहे ग़ालिब,
धुल चेहरे पे थी और हम आईना साफ़ करते रहे!
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फिर तेरे कूचे को जाता है ख्याल
दिल -ऐ -ग़म गुस्ताख़ मगर याद आया
कोई वीरानी सी वीरानी है .
दश्त को देख के घर याद आया!
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चंद तस्वीर-ऐ-बुताँ , चंद हसीनों के खतूत,
बाद मरने के मेरे घर से यह सामान निकला!
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हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है,
तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तगू क्या है!
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Sad Mirza Ghalib  Shayari in Hindi

Mirza Ghalib Shayari In Hind

हर रंज में ख़ुशी की थी उम्मीद बरक़रार,
तुम मुस्कुरा दिए मेरे ज़माने बन गये!
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तोड़ा कुछ इस अदा से
तालुक़ उस ने “ग़ालिब”
के सारी उम्र अपना क़सूर ढूँढ़ते रहे!
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भीगी हुई सी रात में जब याद जल उठी,
बादल सा इक निचोड़ के सिरहाने रख लिया!
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रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ाइल,
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है!
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फ़िक्र-ए-दुनिया में सर खपाता हूँ
मैं कहाँ और ये वबाल कहाँ!
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चाहें ख़ाक में मिला भी दे किसी याद सा भुला भी दे,
महकेंगे हसरतों के नक़्श हो हो कर पाएमाल भी!
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Md wasim Ansari

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